Khansi Ki Dawa राजस्थान/मध्यप्रदेश में बच्चों की संदिग्ध मौतें — क्या हुआ और क्यों सचेत रहें
हाल ही में राजस्थान और मध्यप्रदेश के कुछ इलाकों में छोटे बच्चों की अचानक मौतों की खबरें आईं। अधिकारियों ने इन मामलों की प्रारम्भिक जाँच में यह संकेत पाया कि कुछ बच्चों को कफ सिरप (cough syrup) दिया गया था और यह सिरप लेने के बाद वे तेज बीमार पड़ गए — किडनी फ़ैल होना और नर्वस सिस्टम से जुड़े लक्षण रिपोर्ट हुए। राज्य सरकारों ने संदिग्ध सिरप के नमूने जाँच के लिए भेज दिए हैं और कुछ ब्रांडों की बिक्री पर अस्थायी पाबंदी भी लगाई गई। यह एक गंभीर चेतावनी है कि ओवर-द-काउंटर दवाइयों का प्रयोग बिना डॉक्टर की सलाह से न करें और बच्चों को किसी भी वयस्क दवा का सेवन न कराएँ।
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Khansi Ki Dawa से Gambian मे क्या हुआ :-
यह मामला ज़मीन पर पहले भी दुनिया में घट चुका है। अक्टूबर 2022 में गाम्बिया में लगभग 70 से अधिक बच्चों की मौतें दर्ज हुईं — जिनमें कई के शरीर में किडनी की गंभीर समस्याएँ पाई गईं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और स्वतंत्र प्रयोगशालाओं की जाँच में उन सिरपों में ethylene glycol और diethylene glycol जैसे जहरीले रसायन पाए गए थे — जो सामान्य तौर पर औद्योगिक पदार्थ हैं और दवा में इस्तेमाल नहीं होने चाहिए। इस कांड ने दिखाया कि यदि किसी दवा के excipients (बेहतर कहें — गैर-गतिशील सामग्री) में गड़बड़ी हो जाए तो बहुत बड़ा जनहानि हो सकती है।
दवा में दो मुख्य हिस्से — API और Excipients (सरल भाषा में)
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API (Active Pharmaceutical Ingredient) — यह दवा का असली सक्रिय घटक होता है। जो रसायन रोग से लड़ता है या लक्षण को कम करता है। उदाहरण: खांसी के लिए कुछ सिरपों में cough suppressant या expectorant के रूप में मौजूद मूल तत्व।
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Excipients — ये वह बाकी सामग्री होती हैं जो दवा को पीने लायक बनाती हैं: स्वाद, गाढ़ापन, स्थिरता, रंग, संरक्षक इत्यादि। Excipients का उद्देश्य दवा को सुरक्षित, टिकाऊ और उपयोगी बनाना है — पर ये खुद किसी रोग पर प्रभाव नहीं डालते।
यदि Excipients में सस्ता या अनुचित पदार्थ मिलाया जाए (जैसे glycerin के स्थान पर सस्ता industrial solvent), तो वह विषाक्त हो सकता है और बच्चों के शरीर में गंभीर नुकसान कर सकता है।
कैसे मिलावट (adulteration) जानलेवा बन जाती है किसी भी दवाई मे Khansi Ki Dawa म खास कर
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कई बार निर्माता/सप्लायर लागत बचाने के लिए सस्ती और असुरक्षित सामग्री का इस्तेमाल कर लेते हैं।
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Diethylene glycol (DEG) और ethylene glycol आमतौर पर antifreeze या औद्योगिक सल्वैंट होते हैं; इनका उपयोग दवाओं में नहीं होना चाहिए। बच्चों के शरीर में इनका सेवन तेज़ी से किडनी और नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकता है, और मृत्यु तक ले जा सकता है।
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कभी-कभी लेबलिंग, पैकिंग या लैब टेस्टिंग में भी गड़बड़ी की शिकायतें आई हैं — इसलिए केवल ब्रांड का नाम देख कर भरोसा नहीं करना चाहिए; स्रोत और प्रमाणिकता ज़रूरी है
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अपने लिए सावधानियाँ
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किसी भी दवा को विशेषकर बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के कभी न दें।
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अगर किसी बच्चे को अचानक उल्टी, सांस लेने में दिक्कत, बहुत कम पेशाब या सुस्ती दिखे — तुरंत अस्पताल ले जाएँ और सुनिश्चित करें कि हाल ही में क्या-सी दवाई दी गई थी।
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दवा की बॉटल/बॉक्स पर बैच नंबर, मैन्युफैक्चर डेट और expiry रखें; यदि अस्पताल से कहा जाए तो इन्हें साझा करें — जाँच में ये जानकारी जरूरी होती है।
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अगर किसी इलाके में सिरप की वजह से समस्याएँ आ रही हों तो स्थानीय स्वास्थ्य विभाग को सूचित करें और अपने आसपास के लोगों को चेतावनी दें।
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दवा लेने से जुड़ी कोई शंका हो, तो इसकी जानकारी सामाजिक मीडिया पर बिना पुष्टि के फैलाने से पहले आधिकारिक सूचनाओं (स्वास्थ्य विभाग, WHO जैसी संस्थाओं) की जाँच करें।
